आत्म योगी भव : ‘करुणा धर्म’ पढ़ें विशेष

ये लेख आत्म योगी भव पुस्तक से है जिसकी लेखिका : श्रीमती वसंता शास्त्री व श्रीमती जसविंदर कौर हैं 8447084018

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राधाजी न्यूज़। जीसस क्राइस्ट ने कहा ”ईश्वर के राज्य में प्रवेश करें, देव राज्य की शरण में रहें, उसके धर्म का पालन करें।“ उसके धर्म का पालन करने से आप को शांति, सौभाग्य, तृप्ति, संतोष सब मिलेगा। देव राज्य कहाँ है ? वह राज्य तुम्हारे अंदर है। ध्यान करके ही देव राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। वह एक उत्तम तीर्थ है। ईश्वर के साम्राज्य में प्रवेश करना अर्थात ध्यान करना। उसके धर्म का पालन करना अर्थात करुणा करना। कोई भी दुखी या दीन स्थिति में है उसकी सहायता करना ही धर्म है। दूसरों का दुःख बाँटना ही करुणा है। खुद के अंदर जाना ध्यान है दूसरे प्राणी को कष्ट ना देना अहिंसा है, सकल प्राणि कोटि के साथ मिलकर रहना मित्रता है और सबकी सहायता करना करुणा है। हम जो दूसरों की मदद कर सकते हैं वह करना ही करुणा है। अगर मोक्ष चाहिए तो अहिंसा में जीना है। मुक्ति का अर्थ जीवात्मा परमात्मा में मिलना नहीं है। हम परमात्मा ही ऊपर से नीचे आए हैं। नीचे आ कर मांस खाया, प्राणियों की हत्या की तो मुक्ति नहीं मिलेगी। खुद को आत्मघाती बम लगाकर दूसरों को भी मार देना करुणा नहीं है। जिसके अंदर करुणा नहीं है उसको आत्मज्ञान नहीं है। करुणा करना ही आत्मज्ञानी का लक्षण है। खुद जीना और दूसरों को जीने देना ही करुणा है। कोई बूढ़ा खड़ा है और जवान सीट पर बैठा है अपनी सीट बूढ़े को देना ही करुणा है। करुणा अर्थात सहानुभूति। प्रत्येक जीव के प्रति दया भाव हो।

पिरामिड मास्टर्स करुणा की मूर्ति हैं। वह गाँव . गाँव जाकर ध्यान प्रचार करते हैं। मैं स्वयं तो एक घंटा ध्यान कर रहा हूँ पर दूसरों को नहीं सिखाया तो मेरे अंदर करुणा नहीं है। मैं खुद ध्यान करके कर्नूल में ही बैठ सकता था पर मैंने जगह . जगह जाकर लोगों को ध्यान सिखाया है। ध्यान प्रचार करना मेरा धर्म है। घर . घर जाकर ध्यान सिखाना ही करुणा धर्म का पालन करना है। जो लोग दूसरों को ध्यान नहीं सिखाते वह अधर्म कर रहें हैं। ध्यान करना प्रथम धर्म है, ध्यान प्रचार करना चैथा धर्म है। मेरे पास जो है वह दूसरों में बाँटना ही करुणा धर्म है। हमसे जो उच्च स्थिति में हैं उनको देख कर खुश होना है और जो निम्न स्थिति में हैं उनके ऊपर करुणा करना है। गौतम बुद्ध से किसी ने पूछा “ब्रह्मज्ञानी कैसे जीते हैं?” बुद्ध ने कहा ”ब्रह्मज्ञानी मैत्री, करुणा, मुदिता, उपेक्षा का पालन करते हुए जीता है।” मैत्री अर्थात सबके साथ मित्रता करना है। करुणा जो हमसे कम उन्नत स्थिति में है उसकी सहायता करना है। हर पल करुणा करने के लिए अवसर ढूंढते रहना है। ऐसे अवसर हमेशा आते रहते हैं मगर हम खुद में ही इतना उलझे रहते हैं हमें वह अवसर दिखाई नहीं देता।

जब भीष्म पितामाह तीरों की शैय्या पर थे तो कृष्ण ने धर्मराज से कहा कि “भीष्म पितामह के शरीर छोड़ने से
पहले उनसे राजनिति का ज्ञान लेकर आओ।” धर्मराज ने कहा “भीष्म पितामह इस समय खुद बहुत कष्ट में हैं,
इस समय जाकर ज्ञान सिखाने की बात करना उचित नहीं है।“ कृष्ण ने कहा “अगर तुम इस समय जाकर उनसे राजनीती का ज्ञान नहीं सीखोगे तो सारा ज्ञान उनके शरीर छोड़ते ही उनके साथ चला जायेगा, तब राजनीति के गूढ़ रहस्य किससे सीखोगे। यही उचित समय है। जाओ पितामह के शरीर छोड़ने से पहले उनसे राजनिति का ज्ञान लेकर आओ।” उस समय भीष्म पितामह ने तीरों की शैय्या पर लेटे हुए धर्मराज

को राजनिति के सूक्ष्म रहस्यों का ज्ञान दिया। इतना दुःख में रहने पर भी दूसरों की मदद करनी है। हम सोचते हैं कि “मैं खुद ही इतना दुखी हूँ मैं क्या मदद कर सकता हूँ।” श्री चंद्रशेखर शर्मा जी एक सीनियर पिरामिड मास्टर हैं। एक दिन उन्होंने स्टोव के ऊपर नहाने के लिए पानी गर्म किया। उसी समय दरवाजे की घंटी बजी वह दरवाजा खोलने के लिए गए तो जल्दबाजी में पूरा गरम पानी उनके ऊपर गिर गया। वह घर में अकेले थे। उन्होंने एक चादर ओढ़कर दरवाजा खोला, दो व्यक्ति ध्यान सीखने आए थे। उसी स्थिति में उन्होंने उनको आधा घंटा ध्यान करवाया। तब तक पूरे शरीर में बहुत छाले हो गए थे। उनके जाने के बाद वह बेहोश होकर बिस्तर पर गिर गए। रात को महावतार बाबा जी उनके पास आए और उनके पूरे शरीर पर हाथ फेरा तो सारे छाले ठीक हो गए। जब हम अपना दुःख भूलकर दूसरों की मदद करते हैं तो एस्ट्रल मास्टर्स हमारी मदद करते हैं। जीसस को जब सूली पर चढ़ाया गया तो उसने भगवान से कहा ”इन सब को क्षमा कर दो इन्हें नहीं पता यह क्या कर रहें हैं।” हमें चंद्रशेखर और जीसस से करुणा सीखना है। आप किसी भी स्थिति में हो दूसरों को ध्यान सिखाना ही करुणा करना है।

नोट : आप भी ध्यान द्वारा ज्ञान के प्रकाश में आयें ध्यान करें शाकाहारी बनें, हमारा चंडीगढ़ का पता जहाँ आप भी पिरामिड ध्यान कर सकते हैं : सूद भवन , सेक्टर 44 A, चंडीगढ़, मैडिटेशन क्लास सूद भवन में, हर शनिवार शाम 5 बजे से 7 बजे तक और हर रविवार शाम 6 बजे से शाम 8 बजे तक सम्पर्क करें : 9888609069

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