निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह में 90 जोड़े विवाह सूत्र में बंधे।

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चण्डीगढ, पुनीत सैनी। संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में आज यहां आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में मिशन की आध्यात्मिक प्रमुख सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य में 90 जोडे़ विवाह सूत्र में बंधे । महाराष्ट्र के 52वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के समापन के बाद उसी स्थान पर नवी मुंबई खारघर स्थित सिडको मैदान में यह समारोह संपन्न हुआ।

सादे, पर प्रभावशाली ढंग से आयोजित इस समारोह का शुभारंभ निरंकारी मिशन के पारंपरिक ‘जयमाला’ एवं ‘सांझा हार’ से हुआ । संगीत के बीच पवित्र मंत्र स्वरुप 4 निरंकारी लांवां पढ़ी गयी एवं हर लांवां के अंत में सद्गुरु माता जी एवं अन्य श्रद्धालु भक्तों द्वारा जोड़ों पर फूलों की वर्षा की गई ।

नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए सद्गुरु माता जी ने कहा कि वे सब अपनी अपनी गृहस्थ की जिम्मेदारियों को बखुबी निभायें। ऐसा करते समय वे अधिकारों की अपेक्षा अपने कर्तव्यों को ज्यादा महत्व दें द्य सद्गुरु माता जी ने निरंकार प्रभु से जोड़ों की सेवा, सुमिरण एवं सत्संग करते हुए कल्याण की प्रार्थना की।

समारोह की प्रमुखताएँ

आज के इस विवाह समारोह में मुंबई क्षेत्र के 45 जोड़े थें जबकि अन्य दुल्हे-दुल्हनें आंतरराज्यीय थीं । मुंबई से 60 दुल्हें एवं 52 दुल्हनें थी तथा शेष महाराष्ट्र से 22 दुल्हे एवं 28 दुल्हनें आई हुई थी । आठ दुल्हे एवं 9 दुल्हनें अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से थीं। उनमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ, ओडिशा, कर्नाटक, गोवा एवं आसाम का समावेश है ।

उनकी शिक्षा एवं पेशे की दृष्टि से 27 दुल्हें एवं उतनी ही दुल्हनें स्नातक हैं जबकि 5 दुल्हें और 7 दुल्हनें स्नातकोत्तर पदवी धारक थीं । उनमें 2 दुल्हें इंजिनियर हैं और 2 वकील हैं। दुल्हनों में 3 इंजिनियर हैं । तेरा जोड़ों में लडकियाँ लडकों से उच्च शिक्षित थीं जबकि उतने ही अन्य जोड़ों में लडके लडकियों से अधिक शिक्षित हैं।

एक जोड़ी ऐसी है जिसमें दुल्हा एवं दुल्हन दोनों ने दुसरी बार शादी की है जबकि एक अन्य जोड़ी में दुल्हा और दुल्हन दोनों दिव्यांग (मूक बधीर) हैं। दुल्हें एवं दुल्हनों के आयु में कुछ महिनों से लेकर 14 साल का अंतर देखा गया ।

यह कहना रोचक होगा कि 17 दुल्हें एवं 12 दुल्हनें संत निरंकारी मिशन की अनुयायी नहीं हैं । इसका मतलब मिशन के बाहर के 29 परिवारों ने इस सादे शादियों को पसंद किया। निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह की यह विशेषता है कि यहाँ सम्बन्ध जोड़ने में जाति या धर्म कोई मायने नहीं रखते । विवाह समारोह की संपन्नता के बाद मिशन की ओर से दुल्हे-दुल्हनों के परिवार, रिश्तेदार एवं मित्र परिवार को लंगर खिलाया गया ।

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