बुरे दौर से गुजर रहा देश : प्रणब मुखर्जी

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राधाजी न्यूज़। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताई है और कहा है कि देश बुरे दौर से गुजर रहा है। ‘Towards Peace, Harmony and Happiness: Transition to transformation’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता काफी बढ़ गई है। प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘जिस धरती ने दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम और सहिष्णुता, स्वीकार्यता और क्षमा के सभ्यतागत मूल्यों की अवधारणा दी, वह अब बढ़ती असहिष्णुता, गुस्से का इजहार और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर खबरों में है।’ मुखर्जी ने कहा कि शांति और सौहार्द्र तब होता है जब कोई देश बहुलवाद का सम्मान करता है, सहिष्णुता को अपनाता है और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भावना को बढ़ावा देता है. पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘हालिया समय में संस्थान गंभीर दबाव में रहे हैं और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। शासन और संस्थानों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक तौर पर उदासीपन तथा मोहभंग की स्थिति है. इस विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए सुधार संस्थानों के भीतर से होने चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘संस्थान राष्ट्रीय चरित्र का आईना हैं। हमारे लोकतंत्र को बचाने के लिए इन संस्थानों को बिना किसी विलंब के लोगों का भरोसा वापस जीतना चाहिए.’ उनकी टिप्पणी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच हालिया तनाव के मद्देनजर आई है।

इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति ने शासन और संस्थानों के कामकाज को लेकर मोहभंग की स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि संस्थान राष्ट्रीय चरित्र का आईना हैं और भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्हें लोगों का विश्वास दोबारा जीतना चाहिए उन्होंने संस्थानों और राज्य के बीच शक्ति के उचित संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया जैसा कि संविधान में प्रदत्त है। मुखर्जी ने कहा कि संस्थानों की विश्वसनीयता बहाली के लिए सुधार संस्थानों के भीतर से होने चाहिए। प्रणब मुखर्जी फाउंडेशन और सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल डेवलपमेंट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘हमारे संविधान ने विभिन्न संस्थानों और राज्य के बीच शक्ति का एक उचित संतुलन प्रदान किया है. यह संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए।

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