मान साहब से संगीत की शिक्षा लेना मेरे लिए तपस्या से कम नहीं था : गजेन्द्र फोगाट (Interview)

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इंटरव्यू, चंडीगढ़, राधाजी न्यूज़,(पुनीत सैनी)। हमारे भारत महान में कला की कमी नहीं है और कला ने समय समय पर ऐसे कलाकारों को पेश किया है जिन्होंने भारत की संस्कृत विरासत को अपने कन्धों पर सहारा दिया और युगों तक संस्कृति और कला को अपने स्थान पर बनाकर रखा है। भारत देश के प्रत्येक राज्य की अपनी संस्कृति-कला प्रसिद्ध है। एक तरफ भारत का एक राज्य हरियाणा जहाँ एक मशहूर कहावात है.. ‘दूध दही का खाना यो मेरा हरियाणा’ जी उसी तरह हरियाणा प्रदेश में संगीत कला हरियाणवी लोकगीत का महत्त्व दशकों से उतना ही रहा है, जितना की एक राष्ट्र में देशभक्ति का महत्त्व होता है। आज हम बात कर रहे हैं हरियाणवी लोक संगीत के ऐसे कलाकार की जिसने अपने गुरु से संगीत कला को सीखना तपस्या समझा और समय के साथ कामयाबी के मुकाम को हासिल किया।

28 फरवरी 1977 को हरियाणा में रोहतक जिले के मलिकपुर गाँव(पहले झज्जर में था) में जन्मे गजेन्द्र फोगाट, न्यूज़ वेबसाइट राधाजी.कॉम को दिए इंटरव्यू  में गजेन्द्र ने बताया कि परिवार में, मित्रों में वे हमेशा से हरफनमौला रहे।  गजेन्द्र को बचपन से गाने और एक्टिंग का शोंक रहा और अपनी बड़ी बहिन के साथ वे लगातार हर समय कुछ न कुछ गुन गुनाते रहते थे। शिक्षा क्षेत्र में गजेंदर साइंस के छात्र रहे, गजेन्द्र छट्टी कक्षा के विद्यार्थी थे जब साल 1987 में उन्होंने गुरदास मान जी का मशहूर गाना दिल दा मामला की शूटिंग देखी और गाने रिलीज़ होने के बाद घर पर दिल दा मामला की एक कैसेट ले आये और साथ में गजेन्द्र के पिता जी भी संगीत सुनने के शोकीन थे, उन्होंने ने भी बेटे के साथ संगीत सुना, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये एक कैसेट उनके बेटे को संगीत प्रेमी बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।  धीरे-धीरे समय बीतता गया.. गजेन्द्र के संगीत प्रेम को देखते हुए उनके पिता विरोध भी करते रहे, लेकिन गजेन्द्र दिल दा मामला सुनने के बाद मशहूर गायक बनने का जो ख्वाब देख चुके थे, उससे कभी पीछे हटना नहीं चाहते थे।

जब गजेन्द्र कलाकार के रूप में उभरे :

गजेन्द्र जब CRA कॉलेज सोनीपत में स्नातक शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तब से वे हरियाणवी ऑर्केस्ट्रा में व थिएटर में खुद को आजमाने लगे और वह दिन आ गया गजेन्द्र ने गुरदास मान जी से संगीत की शिक्षा लेने के लिए घर परिवार से दूर रहने लगे। गजेन्द्र ने बताया मान साहब से मिली संगीत शिक्षा व जिन्दगी जीने की प्रेरणा ने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया, हालाकिं गजेन्द्र अपने पिता को भी गायकी में अपना सह-गुरु मानते हैं। उनका कहना है कि यदि पिता जी विरोध न करते तो शायद गजेन्द्र आज गायक न होते।

1994 में गजेन्द्र ने पेशेवर गायक की तरह गायकी में कदम रखा और 1995 में पहली हरियाणवी कैसेट लॉन्च की उसके बाद गजेन्द्र ने पीछे मुडकर नहीं देखा अपनी कामयाबी की सीढियों पे लगातार वे चढ़ते चले गये। बस उन्हें विश्वास रहा अपने माता-पिता व उनके गुरु मान साहब के आशीर्वाद पर।

गजेन्द्र बताते हैं की यदि कोई व्यक्ति ठान ले की मुझे कोई कलाकार, गायक, इंजीनियर, साइंटिस्ट या डॉक्टर बनना है तो उसे केवल अपने लक्ष्य से प्रेम करना होगा कि मुझे ये बनना है, ये मेरा लक्ष्य है,  तब दुनिया का कोई विरोध उस व्यक्ति को उसका सपना पूरा करने से नहीं रोक पायेगा, लेकिन छोटे से बड़ा बनना ही असल जिन्दगी में सपना पूरा करना होता है।

साल 1999-2000 में गजेन्द्र ने भारत के प्रथम रियल्टी शो सुपर स्टार में प्रतिद्वंदी के रूप में भूमिका निभाई, उस शो के एंकर चंकी पाण्डेय होते थे, जूरी सदस्यों में बप्पी लहरी, पल्लवी जोशी, महेश मांजरेकर और सुजोय घोष, यह प्रोग्राम उस समय प्रचलित दूरदर्शन चैनल डीडी-1 व दूरदर्शन मेट्रो पर सचालित होता था। इस रियल्टी शो में गजेन्द्र का चयन भी काफी रोमांचित था, जब एक दफा गजेन्द्र चंडीगढ़ 17 प्लाजा में एक कार्यक्रम मे परफॉरमेंस दे रहे थे, तभी डीडी-1 के कार्यक्रम ‘सुपर स्टार’ रियल्टी शो के डायरेक्टर्स गजेन्द्र की एक्टिंग व संगीत के प्रति रूचि को देखकर बहुत प्रभावित हुए व उनका चयन अपने रियल्टी शो के लिए कर लिया। तब कुछ समय के लिए गजेन्द्र मुंबई भी रहे और गजेन्द्र उस रियल्टी शो सुपर स्टार में फाइनलिस्ट स्थान प्राप्त करने में कामयाब हुए। इसके बाद साल 2007-8  में गजेन्द्र डी.डी-1 के टीवी सीरियल में भी अद्कारी कर चुके, अभी तक गजेन्द्र पंजाबी फिल्मों में व हरियाणवी लोकगीत एलबम्स में खुद का सितारा चमका चुके हैं।

माता के ईमेल ने दिलाई बॉलीवुड में बड़ी उपलब्धि : 

गंजेंद्र ने अपने कैरियर में बहुत सी मुश्किलों व दिक्कतों का सामना भी किया उनका कहना है की हर कलकार को मुश्किल दौर से गुजरना पड़ता है संघर्ष में गजेन्द्र हमेशा मशहूर चार्ली चैपलिन की एक बात याद रखते थे I always like walking in the rain, no one can see me crying गजेन्द्र ने बताया कि बहुत से दर्दों को पाल कर एक कलाकार बनता है वो वक़्त आ चला था कि जब एक माता पिता व गुरु का सर फक्र से ऊँचा हो। जुलाई 2015 में गजेन्द्र ने मशहूर बॉलीवुड फिल्म गुड्डू रंगीला में गाना गाया ‘कल रात माता का मुझे ईमेल आया है’ ये बॉलीवुड फिल्म ब्लॉकबस्टर पर छाई रही और इसमें मुख्य किरदार के रूप में अरशद वारसी व रोनित रॉय अदिति के साथ नज़र आये ।

वर्तमान समय की राजनीति पे गजेन्द्र की प्रतिक्रिया …

गजेन्द्र एक कलाकार के रूप में उभरे और गजेन्द्र ने बताया कि आज वे जो कुछ भी गायकी की दुनिया में हासिल कर पाए वे उनके संगीत गुरु गुरदास मान जी की ही देन है । उन्होंने बताया कि उनके गुरु मान साहब हमेशा से उन्हें एक ही बात कहते थे गजेन्द्र एक कलाकार के लिए मंच उसी तरह पवित्र है जिस तरह एक भक्त के लिए मंदिर का दरबार.. इसलिए मंच पर जव भी चढो तो राजनीती की जूतियों को उतारकर ही चढना। इसलिए गजेन्द्र का मानना है कि उनके संगीत कैरियर की शुरुआत से अब तक उन्होंने ने राजनीति से दुरी बनाये रखीं। गजेन्द्र ने ये भी ज़ाहिर किया कि जिस दिन उनके दर्शक व समाज सर्वसम्मति से उन्हें आदेश देंगे कि अब देश, राज्य, शहर व कस्बों को गजेन्द्र जैसा कलाकार एक नेता के रूप में चाहिए तो वे बेझिझक राजनीति में भी कदम रखेंगे।

गजेन्द्र ने बताया संगीत व्यक्ति को स्वस्थ भी रखता है !

गजेन्द्र कहते हैं कि आज कल वर्तमान समय में लोग चिंता, परेशानियों व नकारात्मक तथ्यों से घिरे हुए हैं और फुर्सत नाम की चीज़ उनके जीवन में समाप्त हो चुकी है। लेकिन फिर भी एक गायक होने के नाते मैं लोगो से गुजारिश करूंगा कि संगीत सुनें, संगीत मन को शांति देता है हृदय को हर्शौलास से भर देता है। साथ ही मोबाइल फ़ोन व इन्टरनेट से कुछ समय दुरी बनाये क्यूंकि आज की आधुनिक तकनीक हमें कहीं न कहीं मानसिक व हृदय से कमजोर भी बना रही है। गजेन्द्र ने संगीत से उपचार का सबसे बड़ा उदाहरण अपने एक मित्र का भी दिया। जिन्हें गले का कैंसर हो चूका था और सभी जगह से जवाब मिलने के बाद उस मित्र ने स्वयं ही संगीत थेरपी का अभ्यास शुरू कर खुद को रोगमुक्त किया। इसलिए गजेन्द्र का मानना है कि संगीत को प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में योग की तरह अपना ले और स्वस्थ रहे ।

युवा पीढ़ी के लिए गायक गजेन्द्र का एक सन्देश

गजेन्द्र ने वर्तमान युवा पीढ़ी को एक सन्देश देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने लक्ष्य व मंजिल को तय करे जीवन में मुश्किलें आती है, उनका सामना धैर्य से करें, चिंतित होकर नशे की लत न लगाये, नशा करना है तो अपनी मंजिल को पाने का नशा करें, कुछ बनकर समाज व राष्ट्र के कल्याण करने का लक्ष्य रखें।

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