ऋषिकेश में 3 दिन चले ध्यान महाकुम्भ का समापन समारोह भव्य रहा।

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ऋषिकेश, राधाजी न्यूज़,(पुनीत सैनी)। गंगा की धवल लहरों, आस-पास के गंगा घाटों पर सायंकालीन आरती की स्वर लहरों के बीच आती-जाती सांसों को महसूस करने का उपक्रम ध्याम कुंभ 2 नवम्बर को शाम ब्रहमऋषि सुभाष पत्री और परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने महाकुंभ का शुभारंभ किया।

इस मौके स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग ध्यान से ही जीवन के असली उददेश्य हासिल किए जा सकते हैं। कहा कि स्वस्थ मन और अच्छे विचार के लिए ध्यान जरूरी है। कार्यक्रम में शिरकत कर रहे लोग ध्यान कुंभ के अनुभवों को जीवन में उतारेंगे।

ब्रहमऋषि सुभाष पत्री ने देवभूमि उत्तराखंड और गंगा का ध्यान करते हुए कहा कि यहां से प्रसारित होने वाले संदेश से हर कोई लाभान्वित होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को ध्यान के लिए प्रेरित करने के लिए हो रहे प्रयासों को गति दी जा रही है। कहा कि अब लोग समझ रहे हैं। इससे समाज में स्वस्थ मन की महत्ता बढ़ेगी।

इस मौके पर केन पो रनपोचे, सुनील आचार्य, पिरामिड स्प्रिचुअल सोसाइटी मूवमेंट के डीएनल शास्त्री श्रीमती बसंता शास्त्री, अर्जुन कम्बोज, अरूणा सहगल, किशोर आदि मौजूद थे। इससे पूर्व परामर्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने ब्रहमऋषि सुभाष पत्री को रूद्राक्ष का पौधा देकर उनका तीर्थनगरी में स्वागत किया।

इस मौके पर ध्यान साधकों ने गंगा के तट पर आयोजित भव्य गंगा आरती में शिरकत की। शुक्रवार प्रातः पांच बजे से ध्यान योग की कक्षाएं शुरू हांगी। इसमें प्रख्यात प्रशिक्षकों सानिध्य मिलेगा। दोपहर में ध्यान से संबंधित विभिन्न विषयों पर डिवाइन टॉक होंगी।
यह ध्यान महाकुम्भ 3 दिन तक चला जिसमे आये हुआ ध्यानी साधकों ने पत्री जी की अगुवाई में शीर्ष ध्यान प्रक्रिया में एक ओर कदम बढ़ाया। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटी उतर भारत के प्रमुख डीएलएन शास्त्री जी ने ध्यान महाकुम्भ में आये हुए सभी ध्यानी साधकों का आभार प्रकट किया।

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