श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर कर देती है चंडीगढ़ की 19 वर्षीय खूबसूरत हिमांशी की आवाज़।

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चंडीगढ़, राधाजी न्यूज़, (पुनीत सैनी)। हमारे देश में नौजवान कलाकारों की कोई कमी नहीं है। आये दिन टीवी पर चल रहे रियल्टी शो इस बात का जीता जागते सबूत हैं की देश में कला दिन प्रतिदिन आकाश को छू रही है। ऑडिशन देने घर से तैयार होकर जब आज का युवा माता पिता का आशीर्वाद ले घर से अपने लक्ष्य की ओर जाता है तो एक सपना उस युवा के जहन में होता है कि कुछ कर दिखाना है। कोई मॉडलिंग में अपनी किस्मत आजमाता है, कोई नायिकी में, तो कोई गायिकी में । बस एक  ख्वाब होता है कि उसे अपना हूनर दिखाना है। आज हम एक ऐसी ही हस्ती की बात कर रहे हैं जो केवल 19 वर्ष की आयु में ही गायिकी में अपने सुरों से दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर देती है। जी हाँ हिमांशी तंवर बी.ए प्रथम कक्षा जी.सी.जी कॉलेज चंडीगढ़ की यह खूबसूरत गायिका जिन्हें कॉलेज में जाते ही इनके फैन जूनियर सुनिधि के नाम से बुलाना शुरू कर देते हैं। मंच जब लेती हैं तो वन्स मोर, वन्स मोर बोलकर दर्शक इनकी मनमोहक आवाज़ का आनंद बार बार लेना चाहते हैं। हसीनाओं में हसीन हिमांशी के पिता चंडीगढ़ पुलिस विभाग में कार्यरत है। हिमांशी की माता जी गृहिणी हैं। हिमांशी की तीन बहने है जिनमे वे सबसे बड़ी हैं। हिमांशी ने राधाजी न्यूज़ को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि गायिकी में उनके करियर की शुरुआत आज से 9 साल पहले हुई। वे 8 साल की उम्र में ही फ़िल्में व टीवी देखने की शोकीन व हर तरह हिंदी, पंजाबी, सूफी व अंग्रेजी गानों पर गुनगुनाते रहना इनको पसंद था। इनकी जिन्दगी में एक खास वाक्य तब आया कि हिमांशी की माता जी हमेशा से इनको एक वकील के रूप में देखना चाहती थी। लेकिन उनके पिता हमेशा ये बात सोचा करते थे कि उनकी बेटी का सारा ध्यान गायिकी में हैं वो अच्छा गाती है। तब एक दिन उनके माता पिता ने फैसला लिया कि वे जो करना चाहती हैं अपना करियर जिस लाइन मे बनाना चाहती हैं बना सकती हैं। तब हिमांशी को अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए एक सुनेहरा अवसर मिल गया और फिर हिमांशी को गायकी के लिए जिस इंस्ट्रूमेंट की जरूरत होती उनके पिता वह इंस्ट्रूमेंट उनको ला देते। हिमांशी आज जिस स्त्तर पर गायिकी में पहुंची हैं अब तक की कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता पिता को देती हैं। आपको बता दें कि हिमांशी वैसे तो हिमाचल प्रदेश के सोलन से हैं लेकिन पिता की नौकरी के चलते हैं सोलन से चंडीगढ़ आना पड़ा। अभी कुछ दिनों पहले हिमांशी ने हिमाचली गीत गाया है ‘गप शप’ इस गीत से हिमांशी को हिमाचल से बहुत प्यार मिला और आगे भी हिमांशी हिमाचली गीत गाती रहेंगी।

उस्ताद गुलशन मीर से सूफियाना शिक्षा ली। हिमांशी ने हमे बताया कि मशहूर सूफी गायिका नूरां सिस्टर्स के पिता उस्ताद गुलशन मीर ने हिमांशी को सूफी संगीत की शिक्षा दी। हिमांशी लगभग दो साल उस्ताद गुलशन मीर  के पास बतौर विद्यार्थी रही। हिमांशी ने बताया कि उस्ताद गुलशन मीर के अलावा उन्होंने चंडीगढ़ के जी.सी.जी कॉलेज में प्रोफ्फेसर रह चुके मुरलीधर सोनी जी व चंडीगढ़ में मशहूर म्यूजिक निर्देशक अरुण कांजी और सुभाष गौर जी द्वारा हिमांशी को संगीत के गुर दिए गए। अब वर्तमान में कँवर इकबाल म्यूजिक निर्देशक हिमांशी को संगीत सिखा रहे हैं।

ये बने हिमांशी के प्रेरक। हिमांशी प्रसिद्ध आशा भोसले जी, सुनिधि चौहान, माइकल जैक्सन और शकीरा को अपना प्रेरक मानती हैं। हिमांशी माइकल जैक्सन की तरह डांस करना भी जानती हैं। हिमांशी ने बताया कि वे बॉलीवुड में सिंगर बनने के साथ साथ अपनी एक्टिंग में भी हाथ अजमाना चाहेंगी। इन्हें एक्टिंग भी बखूबी आती है। हिमांशी अभी फिलहाल कई म्यूजिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहीं हैं और उन्हें आशा है कि जल्द ही वे किसी पंजाबी व बॉलीवुड फिल्म के लिए काम करेंगी।

हिमांशी की अब तक की उपलब्धियां ।

1. विनर ऑफ़ समर फेस्टिवल (कुनिहार)

2. वोइस ऑफ़ सोलन 2013

3. गोल्डन वोइस ऑफ़ चंडीगढ़ 2013

4. वोइस ऑफ़ सोलन 2014

5. विनर ऑफ़ हिमाचल की आवाज़ 2014 फर्स्ट रनरअप (दिव्या हिमाचल)

6. विनर ऑफ़ संगम कला ग्रुप 2015 और 2016

7.  सारे गामा पा जज राउंड तक मुंबई 2016

8.  वोइस ऑफ़ इंडिया फेम 2016

9. बेस्ट फीमेल सिंगर 2017 सोलन

10. विनर ‘कॉलेज के टशनबाज़’ 2017 (93.5FM)

 

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